सोनबरसा (बलिया)। एक माँ जब अस्पताल के दरवाज़े पर दस्तक देती है, तो उसकी झोली में सिर्फ़ एक उम्मीद होती है अपने नवजात शिशु की सलामती। लेकिन सोनबरसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उम्मीदों का ये सफर अब दर्द और लूट में बदलता जा रहा है। प्रसव के लिए आईं महिलाओं के परिजनों ने अस्पताल में तैनात महिला स्टाफ नर्सों पर ₹2,000 से ₹3,000 तक की अवैध वसूली का गंभीर आरोप लगाया है। यह वही सरकारी अस्पताल है, जहां निःशुल्क प्रसव सेवाएं देने का दावा किया जाता है। पीड़िता के परिजनों की आंखों में आंसू और दिल में ग़ुस्सा है। एक महिला के पति ने कहा कि सरकारी अस्पताल इसलिए चुना था कि पैसे नहीं थे। लेकिन यहाँ भी बोलते हैं डिलीवरी करानी है तो पैसे दो। कहाँ जाए गरीब आदमी। कुछ परिजनों का यह भी कहना है कि पैसे न देने पर मरीजों से दुर्व्यवहार किया जाता है, इलाज में देरी की जाती है, और मानसिक दबाव बनाया जाता है। जननी बनी शिकार, सिस्टम बना तमाशबीन। जिस जगह पर माँ और नवजात को सबसे ज़्यादा सहारा मिलना चाहिए, वहीं अब उन्हें मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। यह न सिर्फ मानवता के खिलाफ है, बल्कि सरकारी नीतियों की खुली अवहेलना भी है।
प्रशासन मौन, जनता में आक्रोश
अब तक स्वास्थ्य विभाग या जिला प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है। स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है और वे तत्काल जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। क्या गरीब की माँ की चीख़ किसी को सुनाई नहीं देती?
सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुँचे, यह हर नागरिक का अधिकार है। लेकिन जब उसी व्यवस्था में लूट और लालच घर कर जाए, तो समाज की आत्मा भी घायल हो जाती है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए, ताकि सरकारी अस्पताल भरोसे का प्रतीक बने, भय का नहीं।