छात्रों के मुद्दे पर संसद से सड़क तक संग्राम

छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में प्रदर्शन करते राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव एवं अन्य विपक्षी नेता।

जुलाई 21, 2026 - 22:41
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छात्रों के मुद्दे पर संसद से सड़क तक संग्राम
छात्रों के मुद्दे पर संसद से सड़क तक संग्राम
छात्रों के मुद्दे पर संसद से सड़क तक संग्राम

-छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में विपक्ष का संसद मार्च

-राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव सहित कई नेता डिटेन

पवन यादव, राष्ट्रीय प्रसार
नई दिल्ली। दिल्ली में छात्रों एवं छात्राओं पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार को राजधानी में राजनीतिक माहौल गर्मा गया। कांग्रेस समेत विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं ने संसद परिसर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव एवं सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव तथा कई विपक्षी सांसद और राज्यसभा सदस्य शामिल हुए।

विपक्षी नेताओं ने छात्रों पर हुई कार्रवाई को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और नेताओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस एवं सुरक्षा बलों ने बैरिकेडिंग की।
इस दौरान राहुल गांधी को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की घटनाएं सामने आईं। वहीं प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई अन्य नेताओं को भी डिटेन किया गया। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराने वाले जनप्रतिनिधियों के साथ बलपूर्वक व्यवहार किया गया, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
प्रदर्शन में शामिल समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि छात्रों और युवाओं की समस्याओं को सुनना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध की आवाज को सम्मान मिलना चाहिए, न कि उसे दबाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि छात्रों की मांगों को अनसुना किया जा रहा है और जब वे अपनी बात रखने का प्रयास करते हैं तो उन पर बल प्रयोग किया जाता है। नेताओं ने मांग की कि छात्रों पर हुई कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कदम उठाए जाएं।
प्रदर्शन के दौरान विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं की एकजुटता भी देखने को मिली। कई सांसदों ने कहा कि यह केवल छात्रों का मुद्दा नहीं बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी प्रश्न है।
प्रदर्शन के बाद विपक्षी नेताओं ने कहा कि वे छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने सरकार से संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकालने और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करने की अपील की।
इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विपक्ष इसे लोकतंत्र और छात्र अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बता रहा है, जबकि सत्तापक्ष की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और राजनीतिक मंचों पर प्रमुखता से उठने की संभावना है।

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